मंदसौर। मंदसौर को रावण का ससुराल कहा जाता है। मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोत्तरी मंदसौर की रहने वाली थी। यही कारण है कि मंदसौर में रावण को जमाई का दर्जा दिया जाता है। यहाँ की महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने से आज भी पर्दा कर निकलती है।
दरअसल मंदसौर के खानपुरा में रावण की विशाल प्रतिमा स्थापित है। नामदेव समाज के लोग रावण की पत्नी मंदोत्तरी को अपनी बेटी और रावण को जमाई का दर्जा देते हैं। दशहरे के दिन दशानन की विशाल प्रतिमा को पूजा जाता है। नामदेव समाज के लोग ढोल धमाके के साथ रावण की पूजा करने पहुँचते हैं। रावण को फूलों का हार पहनाया जाता है। ढोल ढमाकों से आरती की जाती है। आरती में समाज के सभी लोगों सहित महिलाएं बच्चे बुजुर्ग भी शामिल होते हैं।
ख़ास बात यह है कि रावण की प्रतिमा के सामने से आज भी महिलाए घूँघट करती है। ये मालवा की संस्कृति है जहाँ जमाई का आदर सम्मान महिलाए घूँघट निकालकर करती हैं। सदियों से चली आ रही यह परम्परा आज भी वैसी ही प्रचलित है।
जितनी ख़ास जमाई राजा रावण के पूजा की यह परंपरा है उतना ही चमत्कारिक भी है। यहाँ रावण की पूजा के साथ लोग रावण से मन्नत भी मांगते हैं। मान्यता है कि यहाँ रावण की प्रतिमा के दाएं पैर में लच्छा बांधकर मन्नत मांगी जाती है। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु दशहरे पर पूजा कर चूरमा बाटी का भोग लगाते हैं। यह भी मान्यता है कि बीमार व्यक्ति द्वारा रावण के पैरों में लच्छा बांधने से कई बीमारियां ठीक हो जाती है। यहाँ के लोगों का तो यहां तक मानना है कि रावन की पूजा करने से मंदसौर में कोई विपत्ति नहीं आता है। नामदेव समाज शहर की सुख समृद्धि की कामना लंकापति से करते है।
