आगर-मालवा। आख़िरकार आगर-मालवा में शेर के जिस वीडियो ने इलाके में दहशत मचा रखी थी वह फर्जी साबित हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम को मौके पर शेर होने के कोई सबूत नहीं मिले है। अधिकारियों का कहना है कि शेर का वायरल वीडियो किसी और जगह का है जिसे किसी ने यहाँ का बताकर वायरल कर दिया है। वहीँ प्रत्यक्षदर्शी भी अपनी बात से मुकर गया है।
दरअसल पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर शेर का वीडियो वायरल हो रहा था। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था कि यह वीडियो आगर मालवा जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर स्थित कानड़ गांव का है और यहाँ देर रात शेर पानी पीने के लिए आता है। इस वीडियो के सामने आने से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया था। वहीँ जिला प्रशासन भी सकते में आ गया था।
इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम को मौके पर शेर होने के कोई सबूत नहीं मिले है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में नजर आ रहा शेर गुजरात में होता है। ऐसा शेर पूरे मालवा क्षेत्र में कई वर्षों से नहीं देखा गया। साथ ही वीडियो में नजर आ रही झाड़ियां और पौधे भी मालवा क्षेत्र में नहीं पाए जाते हैं। एक और ख़ास बात यह है कि वीडियो में जो भाषा सुनाई दे रही है वह गुजराती भाषा से मिलती-जुलती है।
इससे स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि यह वीडियो यहां का नहीं बल्कि गुजरात की तरफ से वायरल हुआ है। इस पूरे वीडियो में जिस तरह की सड़क को दिखाया गया है। ऐसी कोई जगह बताई गई जगह के आसपास कई किलोमीटर तक मौजूद नहीं है। इसके अलावा भी वीडियो में कहीं ना कहीं हाथी के चिंघाड़ने आने की आवाज आ रही है। मालवा क्षेत्र में कहीं हाथी भी मौजूद नहीं है। इस पूरे वीडियो में जिस तरह से शेर के इतने नजदीक गाड़ी खड़ी है। उसका प्रकाश शेर पर है साथ ही साथ वहां मौजूद लोगों और शेर को देखा जाए तो दोनों ही बड़े आराम से कितने नजदीकी से खड़े हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे शेर भी जानी पहचानी जगह खड़ा है। वहीँ वीडियो बना रहे लोग भी जानी पहचानी जगह पर मौजूद है। अतः इस तरह से वायरल हुआ मैसेज पूरी तरह से झूठा साबित हुआ है।
