छिंदवाड़ा। आमतौर पर जब भी हमें घर में कोई पुरानी चीज नजर आती हैं, हम उसे कबाड़ समझकर फेंक देते हैं। लेकिन छिंदवाड़ा में रहने वाला एक शख्स ऐसा है जिसे पुरानी चीजों को संजोकर रखना अच्छा लगता है। इस शख्स ने अपने घर में एक म्यूजिम भी बना ऱखा है। इस म्यूजिम में कई ऐसी चीजें रखी है जिसके बारे में हमने सिर्फ किताबों में पढ़ा होगा।
दरअसल छिंदवाड़ा के रहने वाले वसंत चावक के परिवार का रिवाज है कि जो सामान एक बार घर में आ गया उसे पुराना या ख़राब मानकर फेंकते नहीं हैं। इस रिवाज के कारण आज घर में कई पुरानी चीजें इकट्ठी हो गई है। घर में टाइपराइटर, ग्रामोफोन, हारमोनियम, रेडियो के अलावा कई चीजें हैं। ख़ास बात यह है कि ज्यादातर चीजें चालू हालत में हैं। 85 साल के वसंत चावक पेशे से इंजीनियर है। वह इस उम्र में भी सभी काम कंप्यूटर, एंड्रॉयड मोबाइल के जरिए करते हैं।
वसंत चावक के म्यूजिम में दो खास चीजें है जो देश में कई जगह नाम कमा चुकी है। पहली चीज हैं 170 साल पुरानी हाथों से लिखी गीता। इसको वसंत चावक के दादा के दादाजी ने लिखा था। यह गीता आज भी सुरक्षित है। वहीँ दूसरी ख़ास चीज है 1929 के मॉडल की विंटेज कार। आज ये कार देश में कम ही देखने को मिलती है। चावक बताते हैं कि इस कार की कीमत 1 करोड़ तक लग चुकी है। लेकिन उनके परिवार के रिवाज के हिसाब से वे कोई भी पुराना सामान नहीं बेचते हैं इसलिए उन्होंने इसे बेचा नहीं ।
85 साल की उम्र के दौरान कई सामान वसंत चावक ने इकट्टे किए और विंटेज कार की कीमत करोड़ो में आने के बाद भी परिवार का रिवाज और शौक ने देश में अलग मिसाल पेश की है। चार पीढ़ियों की विरासत संभालना किसी चुनौती से कम नहीं है।
