छतरपुर। छतरपुर में गंगा-जमुनी तहजीब और धार्मिक एकता की अनोखी मिसाल देखने को मिली। यहाँ मुस्लिम समाज ने हिन्दू रीति-रिवाज से दो हिन्दू जोड़ों का विवाह करवाया। विवाह के बाद मुस्लिम समाज ने दूल्हा-दुल्हन को धार्मिक ग्रंथ गीता भेंट की और फिर दुल्हन को विदा किया।
दरअसल छतरपुर में मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह निकाह योजना के तहत ख़्वाजा गरीब नवाज़ कमेटी के द्वारा 80 जोड़ों का विवाह कराया गया। इसमें 78 जोड़े मुस्लिम समाज के थे जबकि दो जोड़े हिंदू समाज के थे। मुस्लिम जोड़ों का विवाह मुस्लिम रीति-रिवाज से कराया गया जबकि हिन्दू जोड़ों का विवाह हिन्दू रीति-रिवाजों से कराया गया। इसके लिए बाकायदा मंडप सजाया गया और दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लेकर सभी का आशीर्वाद लिया। इस शादी के गवाह मुस्लिम समाज के हाफ़िज़, मौलवी, मौलाना, उलेमा और अन्य लोग बने।
मुस्लिम समाज में शादी के बाद दुल्हन को धार्मिक ग्रंथ कुरान भेंट किया जाता है। उसी तरह हिन्दू दुल्हन को पवित्र ग्रंथ गीता भेंट की गई। गंगा-जमुनी तहजीब को देख दूल्हा-दुल्हन के परिजनों की आंख में आंसू आ गए। वहां मौजूद हजारों की संख्या में लोगों ने इसकी तारीफ़ की। कमेटी के सदर ने कहा कि भले ही हमारा धर्म, रीति-रिवाज अलग-अलग हो लेकिन हमारा खून, दिल, वतन, एक है। हम जाति मजहबों से ऊपर उठकर सबसे पहले इंसान हैं और इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता है।
इस कार्यक्रम में भोपाल मध्य से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद भी शामिल हुए। उन्होंने बुंदेलखंड की गंगा-जमुनी तहजीब की तारीफ करते हुए कहा कि देश-दुनिया में भले ही कुछ भी चल रहा हो लेकिन यहाँ सब बेमानी है। सच तो यही है जो यहाँ देखने को मिला है।
