सतना। सरकार हर साल स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करती है।उधर सतना के मैहर में सरकारी अस्पताल के हाल यह हैं कि मरीजों को इलाज के दौरान टपकती छत से भी बचना पड़ता है।
सतना जिले के मैहर स्थित सिविल अस्पताल का दृश्य देखकर लगता है कि प्रशासन को मरीजों की कोई फ़िक्र ही नहीं हैं। यहां बरसात के मौसम में मरीज टपकती छत के नीचे भगवान भरोसे इलाज कराने को मजबूर हैं।
अस्पताल के वार्ड नंबर 3 में मरीज और उनके परिजन बरसात से बचने के लिए इस तरह छतरी तान कर बैठे हैं जैसे वे खुले आसमान के नीचे बैठे हों। हर दूसरे-तीसरे बेड पर परिजन छतरी लगाये खड़े हैं। कहीं बेड की दीवारों में मरीजों ने छतरी टांग रखी है।वार्ड में छत की जर्जर हालत देख मरीज जमीन पर बेड लगाकर ही ट्रीटमेंट करा रहे हैं।
मरीजों के परिजनों का कहना है कि बीते तीन दिनों से यही हालत है।इलाज से पहले मरीजों को पानी से बचाने के लिए छतरी लगानी पड़ती है।
डॉक्टरों का कहना है कि इसकी जानकारी लोक निर्माण विभाग को भेजी गई थी। अब तक कुछ मेंटिनेंस नही हुआ है।
