दमोह। 75 साल के रिटायर्ट प्रोफेसर ने अपने जज्बे से गाँव की तस्वीर ही बदल दी है। प्रोफेसर ने गाँव के युवाओं को अपने साथ जोड़ा और उन्हें श्रमदान के लिए प्रेरित कर गांव में मंदिर, धर्मशाला, चबूतरा, प्राइमरी स्कूल और ट्रेनिंग सेंटर बनवाया। यही नहीं प्रोफेसर पिछले पांच सालों से गाँव के युवाओं को निशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग और कोचिंग भी दे रहे हैं।
दमोह जिले के बटियागढ़ जनपद के गढ़ौला खाड़े गांव में रहने वाले मुलायम सिंह ठाकुर उज्जैन के सरकारी पॉलीटेक्निक कॉलेज में प्राचार्य के पद तैनात थे। रिटायरमेंट के बाद मुलायम सिंह गाँव आकर बस गए। गांव की बदहाली देख उन्होंने गाँव की रंगत निखारने की सोची। इसके लिए उन्होंने गाँव के युवाओं को अपने साथ जोड़ा और उनकी कमेटी गठित की। उन्होंने युवाओं को श्रमदान के लिए प्रेरित किया। युवाओं के श्रमदान से गांव में मंदिर, धर्मशाला, चबूतरा, प्राइमरी स्कूल और ट्रेनिंग सेंटर बना। इस काम में उनकी पत्नी कृष्णा लोधी ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गाँव के बच्चे पढ़-लिखकर अच्छा भविष्य बना सके, इसलिए मुलायम सिंह बच्चों को निशुल्क ट्रेनिंग और कोचिंग देने लगे। पिछले पांच सालों से मुलायम सिंह सुबह पांच बजे स्कूल के मैदान में बच्चों फिजिकल ट्रेनिंग और शाम को रिटर्न टेस्ट की तैयारी करवाते हैं। इसमें हर साल करीब दो लाख रुपए का खर्च आता है जिसे वह अपनी पेंशन की राशि से ही खर्च करते हैं।
