नरसिंहपुर। कहते है जब किसी का हौसला बुलंद हो तो बड़ी से बड़ी परेशानियाँ भी पस्त हो जाती है। नरसिंहपुर की एक ऐसी ही युवती के जज्बे को देखकर आप उसे सलाम किए बिना नहीं रह पाएँगे। युवती के दोनों हाथ नहीं है बावजूद इसके वह अपने पैरों से कंप्यूटर आपरेटर के पद पर सरकारी जॉब कर रही है।
नरसिंहपुर के आमगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कंप्यूटर ऑपरेटर का जॉब कर रही निधि गुप्ता के साथ कुदरत ने अजीब खेल खेला है। निधि गुप्ता के बचपन से ही दोनों हाथ नहीं है। हालाँकि निधि के हौसलों ने उसे कभी हाथों की कमी महसूस नही होने दी। निधि ने पैरों को अपनी ढाल बनाकर पढ़ लिख कर इतना आगे बढ़ी कि उसने पढ़े लिखे समाज को ही पीछे छोड़ दिया। निधि अपने पैरों से लिखकर ही बीए आईटीआई पैरामेडिकल बीसीए और पीएचडब्ल्यू कर चुकी है। अपनी पढ़ाई के दम पर वह आज कंप्यूटर ऑपरेटर की जॉब को बखूबी कर रही है। वह पैरों से डाटा एंट्री ऑपरेटर का काम कर रही है।
निधि गुप्ता बताती है कि यह जरूरी नहीं है कि हर कोई शारीरिक रूप से परिपक्व हो। यदि हौसला है और जीवन में कुछ करने की चाह है तो मुश्किल खुद पीछे हट जाती है।
एक छोटे से गांव के साधारण परिवार में रहने वाली निधि बचपन से ही अपना सारा काम खुद करती है। पढ़ाई-लिखाई करनी हो या फिर अपनी सहेलियों से मोबाइल पर गपशप, निधि ने कभी किसी का सहारा नहीं लिया। ग्रामीण बताते हैं कि निधि बहुत साधारण परिवार से है। प्रशासन ने कई बार मदद की बात तो कही है लेकिन आज तक कोई मदद नहीं दी। बावजूद इसके निधि ने अपना नाम खुद के दम पर ऐसा रोशन किया कि वह दूसरों के लिए भी अंधेरे में उजाले का काम कर रही है।
आमगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर बताते हैं कि निधि अपना सारा काम बखूबी पैरों के दम पर कर लेती हैं। निधि इन उन लोगों के लिए मिसाल है जो हाथ पैर होते हुए भी कुछ कर गुजरने का हौसला नहीं बना पाते हैं। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो फिर हर मुश्किल आसान हो जाती हैं। इसका सीधा-साधा उदाहरण निधि के रूप में सामने आता है।
कुदरत ने भले ही निधि को हाथ नहीं दिए हो लेकिन उसके पैरों ने कुदरत के लिखे हुए अध्याय को ही बदल कर रख दिया है। निधि स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल बनकर सामने आई है जो कम ही देखने को मिलती है। दिव्यांग होते हुए भी निधि ने जो मुकाम हासिल किया है वह उन तमाम दिव्यांगों के लिए प्रेरणा का सबब है जो अपने आप को कमजोर और असहाय महसूस करते हैं।
