बड़वानी। मध्य प्रदेश के पिछड़े जिलों में से एक बड़वानी जिले में खराब एक सड़क को सुधारने के लिए जब सरकार ने सुनवाई नहीं की तो यहां के स्कूली बच्चों ने खुद ही अपने स्कूल स्टाफ के साथ मिलकर सड़क के गड्ढों को दुरुस्त किया है। ग्राम लिम्बी मे हायर सेंकडरी के बच्चों और स्टाफ ने नवाचार का संदेश देते हुए गड्ढों से भरे मार्ग को श्रमदान के द्वारा दुरुस्त किया। इस स्कूल की दूरी मुख्य मार्ग से लगभग 2 किमी है। रास्ते में दो नाले पडते हैं। इस रास्ते की हालत इतनी खराब थी कि सड़क पर पत्थर और कीचड़ से पैदल चलने में भी भारी मुश्किलों का सामना करना पडता था। पैदल आने-जाने में एक घंटे का समय लगता था। स्कूल को जाने वाले रास्ते की खराब हालत को लेकर स्कूली बच्चों और स्टॉफ ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत को अपनी परेशानी से अवगत कराया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। बाद में स्कूली छात्रों ने ही स्टाफ के साथ मिलकर इस रोड के गड्ढों को भर दिया है।
13 साल पहले बना था स्कूल
जिले के ग्राम लिम्बी का हाईस्कूल सन 2006 में बना। बाद में 2014 में इसे उन्नयन कर हायरसेकेंडरी स्कूल में तब्दील कर दिया गया। स्कूल में विभिन्न अवसरों पर अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि आते रहे लेकिन किसी ने भी इस स्कूल को जाने वाले मार्ग की खराब खस्ता हालत को लेकर कोई सुध नहीं ली। बाद में बच्चों नहीं अपनी समस्या का समाधान किया है और इस मार्ग के गड्ढों को श्रमदान करके भरा।
10 गांव के बच्चे आते हैं इस स्कूल में पढ़ने
इस विद्यालय में पढ़ने के लिए आसपास के 10 गांव के बच्चे आते हैं। इसके बाद भी इस स्कूल के मार्ग को सुधारने की सुध प्रशासन ने नहीं ली। स्कूल में कुल 230 बच्चे अध्ययनरत हैं जो हाई सेकेंडरी तक पढ़ कर अपने जीवन सवारने का काम कर रहे हैं लेकिन बच्चों की परेशानियों को लेकर जिला प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाए।
छात्राओं को साइकिल नहीं आती थी किसी काम
इस स्कूल को जाने वाले मार्ग की हालत खराब होने के कारण बच्चियों को स्कूल योजना के अंतर्गत जो साइकिलें मिलती थी उन साइकिलों का छात्राएं उपयोग नहीं कर पाती थी, क्योंकि सड़क मार्ग की हालत खराब थी। इसके अलावा स्कूल शिक्षा विभाग की परिवहन सुविधा का लाभ भी स्कूली बच्चों को नहीं मिल पा रहा था। कारण यह था कि कोई भी बस मालिक या वाहन चालक बच्चों को इस खराब सड़क के कारण स्कूल तक परिवहन सुविधा नहीं देते थे।
क्या कहना है प्रभारी प्राचार्य का
इस स्कूल को जाने वाली खराब सड़क को लेकर मैंने कई बार मौखिक रूप से गांव के सरपंच सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया लेकिन उनके द्वारा कोई कदम नहीं उठाए गए। बाद में बच्चों को ही इस सड़क मार्ग को सुधारने की पहल करनी पड़ी है। गांधी जयंती सप्ताह अंतर्गत यहां खराब सड़क के गड्ढे भरे गए हैं और अब अपनी परेशानी का हल बच्चों ने ही निकाला है।
