पन्ना। पन्ना टाइगर रिजर्व में किसी समय शून्य पर पहुँच चुकी बाघों की संख्या वर्तमान में 54 तक पहुँच गई है। पिछले 10 सालों में बाघों की संख्या यहाँ तेजी से बढ़ी है। बाघों का कुनबा बढ़ने से विभाग रोमांचित है। इसे लेकर प्रबंधन ने बाघ उत्सव मनाया है। इसमें बाघों की संख्या बढाने में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया।
दरअसल पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापन योजना को 10 साल हो गए है। इस योजना को बाघों की संख्या बढाने के लिए शुरू किया गया था। कार्यक्रम में बाघ पुनर्स्थापन योजना के सफलतापूर्वक 10 साल होने पर जश्न मनाया गया। इस अवसर पर पन्नावासी भी उत्साहित नजर आए।
हर साल पांच नवम्बर को बाघ पुनर्स्थापन योजना की वर्षगांठ मनाई जाती है। इसी दिन पेंच टाइगर रिजर्व से उस नर बाघ को पन्ना लाया गया था, जिसने बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिजर्व को फिर से गुलजार कर दिया है। वर्तमान समय में पन्ना टाइगर रिजर्व में आधा सैकड़ा से भी अधिक बाघ हो चुके हैं। इनमे अधिकांश इसी नर बाघ टी-3 की ही संतान हैं।
पन्ना बाघ पुनर्स्थापन योजना को कामयाबी से संचालित करने में किसी न किसी रूप में अपना योगदान देने वाले लोगों की मंशा थी कि पन्ना को फिर से आबाद कर उसे गौरव प्रदान करने वाले बाघ टी-3 के सम्मान में पांच नवम्बर को बृहद व भव्य कार्यक्रम आयोजित जाए। इस कार्यक्रम में पन्नावासी भी शामिल हों।
यही वजह है कि पार्क प्रबंधन ने सफलतम 10 वर्ष को समारोह पूर्वक मनाया। बीते 10 वर्षों में अपना अपना योगदान देने वाले हर किसी अधिकारी, कर्मचारी, फ्रेंड्स ऑफ पन्ना के सम्मानीय सदस्य किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में बाघ पुर्नरस्थापन में अपना योगदान देने वाले हर किसी व्यक्ति को सम्मानित व पुरस्कृत भी किया गया।
पन्ना में बाघ पुर्नस्थापन योजना को शानदार कामयाबी इसलिये भी मिली कि पन्ना वासियों ने अपने खोये गौरव को पुन: हासिल करने के लिये हर तरह की कुर्बानी दी है। यही वजह है कि पन्ना में आज तक किसी भी प्रकार का कोई औद्योगिक कारखाना नहीं लगाया जा सका। उस समय तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति द्वारा जन समर्थन से बाघ संरक्षण का नारा दिया गया था जो कालान्तर में चरितार्थ हुआ।
पन्ना टाइगर रिजर्व के संदर्भ में यह नारा आने वाले समय में भी अर्थपूर्ण और कारगर बना और जनसमर्थन से बाघ संरक्षण का यह नारा आगे भी बना रहे इसके लिये जनता की भागीदारी जरूरी है। यही वजह है कि क्षेत्र संचालक पन्ना टाइगर रिजर्व केएस भदौरिया ने यह तय किया कि 5 नवम्बर को आयोजित हुए इस कार्यक्रम में फ्रैंड्स ऑफ पन्ना के सदस्यों को जानकारी दी जाए।
पार्क प्रबन्धन की ओर से पन्ना में उजड़ चुका बाघों का संसार फिर से आबाद करने के पीछे, पन्ना के जिन लोगों का भी सहयोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मिला है। उन्हें इस भव्य कार्यक्रम में बुलाया गया है और यथा सम्मान से उन्हें सम्मानित भी किया गया।
पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 में बाघों की संख्या शून्य हो गई थी तब यहां पर पदस्थ तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर. श्रीनिवास मूर्ति ने बाघ पुनर्स्थापना की योजना बनाई और उसे क्रियान्वित करते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व से और बांधवगढ़ से एक-एक बाघिन यहां लाई गई। जब श्रीनिवास मूर्ति को एहसास हुआ कि यहां पर नर बाघ का अभाव है तब पेंच टाइगर रिजर्व से एक युवा नर बाघ टी3 को यहां लाया गया। इनके अलावा कान्हा नेशनल पार्क से दो अनाथ बाघिनों को भी यहां लाया गया।
कुल मिलाकर उस समय यहां पर 4 बाघिन व 1 नर बाघ लाया गया था और तब से लेकर आज तक यहां अब बाघों की संख्या 54 के ऊपर हो चुकी है। बाघों के संसार को बढ़ाने श्रेय तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर. श्रीनिवास मूर्ति और उस समय पर वंशवृद्धी करने के लिए पेंच टाइगर रिजर्व से आए से नर बाघ टी3 को जाता है जिसे आज पन्ना का भीष्मपितामह कहा जाता है।
