नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले को तीन साल पहले ही ओडीएफ यानि खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है। लेकिन जिले के एक घर में शौचालय न होना परिवार के लिए नासूर बन गया है। अपने दिव्यांग पति और तीन बच्चों के साथ रह रही महिला सालभर से शौचालय के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर गुहार लगा रही है। लेकिन कहीं उसकी सुनवाई नहीं हुई। आख़िरकार थक हार कर महिला कलेक्ट्रेट पहुंची और अपनी व्यथा सुनाई। अब मामले को लेकर प्रशासनिक पर्दादारी शुरू हो गई और जाँच की बात कही जा रही है।
नरसिंहपुर जिले के सूरजगांव में रहने वाली कुंती बाई की कहानी ओडीएफ जिले की सच्चाई से पर्दा उठा रही है। घर में शौचालय बनवाने का आवेदन लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची कुंती बाई ने बताया कि उनके घर में आज तक उन्हें शौचालय नसीब नहीं हुआ। घर में दिव्यांग पति और तीन बच्चों के साथ रह रही कुंती बाई के लिए शौचालय उनके जीवन की सबसे बड़ी समस्या है।
कुंती बाई का कहना है कि ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव को रिश्वत न देने के चलते उनका शौचालय नही बन सका। अब हालात ये हैं कि उन्हें रोजाना परेशानी से दो चार होना पड़ रहा है। जब मामले को लेकर सचिव से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि कुंती का परिवार पिछले 2 साल पहले गांव में आया है। इसी वजह से उसे अभी तक शौचालय का लाभ नहीं मिल सका। हालाँकि हितग्राही को शौचालय नसीब ना होना कहीं ना कहीं सरकारी योजनाओं की मंशा पर अधिकारियों की लालफीताशाही नजर आता है।
यह जिल्लतभरी जिंदगी और खुले में शौच का दंश केवल कुंती के परिवार को ही नसीब नहीं है बल्कि गांव में पिछले तीन पीढ़ी से रह रही 70 वर्षीय रेवती अम्मा के परिवार जैसे और भी परिवार है जो ओडीएफ में हुए भ्रष्टाचार की हकीकत बताती नजर आ रही है।
खास बात तो ये है कि ये सब नजारे तब देखने मिल रहे हैं जब इस जिले ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत बाह्य शौच मुक्त होने का गौरव हासिल किया है। सरकारी पेचीदगियां कई हो सकती हैं पर एक बीपीएल परिवार के पास शौचालय जैसी अहम सुविधा का न होना कहीं न कहीं सिस्टम की खामी पर बड़ा सवाल खड़े कर रही है। साथ ही ओडीएफ में हुए व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार की कहानी कहती नजर आ रही है।
