छिंदवाड़ा। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में दो समूह की महिलाओं ने आपदा को अवसर में बदलकर खुद को आत्मनिर्भर बनाया है। लॉकडाउन के कारण इन महिलाओं का रोजगार छीन गया तो इन महिलाओं ने दोना पत्तल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। इस काम से महिलाओं को अच्छी आमदनी हो रही है। अब तक छिंदवाड़ा और सिवनी में अपना माल बेच रही, इन महिलाओं को अब भोपाल से भी आर्डर मिलने लगे हैं।
दरअसल छिंदवाड़ा जिले के राखीकोल गांव की महिलाएं दूसरों के पास मजदूरी करती थीं। लेकिन लॉकडाउन के कारण महिलाओं के हाथ से रोजगार छीन गया। ऐसे में गाँव की एक दोना-पत्तल बनाने वाली महिला से प्रेरित होकर महिलाओं ने शिखा और राखी नाम से समूह तैयार किया। इसके बाद 16-16 हजार रुपए में दो मशीने बनवाई।
इस काम से महिलाओं को आमदनी भी हो रही है और वह आत्मनिर्भर भी बन गई है। समूह की अध्यक्ष का कहना है कि मशीन की लागत निकल चुकी हैं। अब शुद्ध आमदनी हो रही है। इस काम में ज्यादा खर्चा नहीं है। जंगल से पत्ते मुफ्त में मिल जाते हैं। सिर्फ मशीन का बिजली बिल चुकाना होता है। इसके अलावा दूसरा कोई खर्चा नहीं है। हम मशीनें भी बनावाकर बेच रही, एक मशीन का मूल्य 18 हजार रुपए तय किया है।
उन्होंने बताया कि अब तक छिंदवाड़ा और सिवनी में सामग्री बेच रहे थे। अब भोपाल से भी आर्डर मिलने लगे हैं। मांग की पूर्ति करने के लिए अब आठ मशीनों पर महिलाएं काम करेंगी। माहुल के पत्ते पूरी तरह से हर्बल होते हैं जिसके कारण इनकी मांग बाजार में अधिक है।
